ये चित्र मैने अपनी अभियांत्रिकी के दिनों में बनाया था ये भी समर्पित..
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महान विचारक स्वप्न दृष्टा , मिसाइल मैन की सीख,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत I
स्वप्न नहीं वो जो नींद में दिखते हैं,
अपितु स्वप्न वहीं जो रखे सतत जागृत ,
किया सही अर्थों में स्वप्न को परिभाषित I
आपने ही दी सपनें देखने की सीख,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 1 II
चाहते हो अगर सूरज की तरह चमकना ,
कठिन तप स्वयं को होगा जलना I
पथ प्रशस्त कर सबको साथ ले चलना ,
आप से ही सीखी नेतृत्व की सीख I
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 2 II
पा कर पहली जीत ना कर आराम,
अगर दुसरी बार जो मिल गयी हार,
पहली जीत को कहेंगे लोग, किस्मत का उपहार I
तुमसे ही सीखी निरंतर चलने की सीख,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 3 II
मूसलाधार मेघ बरसे , कड़के भी गर बिजली
बन बाज उड़ चल, बादलो से ऊपरी
हो उड़ान हौसलों से तो मुसीबतें भी पिछड़ी I
कठिन परिस्थिति में भी हौसला रखने की सीख ,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 4 II
स्नेह, मित्रता ,चिंतन ,अध्ययन का ले तु पक्ष,
एक सही पुस्तक हैं सौ मित्र के समकक्ष,
अपितु इक श्रेष्ठ मित्र , समान पुस्तक के कक्ष,
आप ही ने दिये उदहारण मित्रता में हो दक्ष I
युवा-आदर्श, भारत रत्न , युग पुरुष की सीख,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 5 II
इंतजार करने वाला सिर्फ इतना ही हैं पाता,
कोशिश करने वाला जो छोड़ कर हैं जाता I
करता हैं जो प्रयास निरंतर और कष्ट उठाता,
अंततःगत्वा वही स्वर्णिम मंजिल को पाता I
आपने ही दी मजिलो की ओर बढ़ने की सीख,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 6 II
चल पाऊ दिखाये रास्ते पर तेरे
तो धन्य होगा जीवन , कर्म भी मेरे I
लौट आओ फिर से मिटाओ ये अँधेरे,
हटा दो समाज पर लगे बुराइयों के पहरे I
अँधेरे के आग़ोश में इक दीप जलाने की रीत,
बच्चे बच्चे को सिखायी I am Kalam की रीत II 7 II
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