Friday, January 2, 2015

पूर्णिमा

पूर्ण से प्रेरित हो
पूर्णता लिए ,
आज फिर आया हैं
इस  रात्रि में भी ,
दिखती  मुझे मेरी छाया हैं
सुकून नयन का
प्रकाश पुँज
नभ के मस्तक पर ,
बिन्दिया सा आया हैं
प्रेम प्रतीक, शीतल रात
जीवन में रास लाया हैं।



वो भी चाँद बन
जिंदगी की तन्हा  रात  में
कुछ ऐसे ही आया हैं
रात्रि में प्रकृति ने
मिलन गीत  गाया  हैं

था अधूरा भी , अकेला भी
इस सफर में
वो हमसफ़र बन
खुशिया अपार लाया हैं
पूर्ण से प्रेरित हो
पूर्णता लिए
वो  जिंदगी में आया हैं ।

चांदनी में नहाया पल
थम जा ए समय
ना कभी आये कल
ख़ामोशी की बोलियाँ
स्पर्श का अहसास
शांत रात्रि
साँसो में साँस

सितारों की चुनरी में
चाँद सा चेहरा ख़ास
टूट कर , पिघल कर
खुद  को ,
घुला  पाया हैं
प्यार भरी ओस  में
भीगा पाया हैं
आज पंचाल स्वयं को
पूर्ण पाया हैं
पूर्णिमा से प्रेरित हो
पूर्णता लिए
वो  जिंदगी में आया हैं ।

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