नोटबंदी पर पेश हैं मेरी ताजा, अस्त-व्यस्त ४ दर्जन पंक्तियाँ।
मन को भाये तो share जरूर करना
नोटबंदी
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मन को भाये तो share जरूर करना
नोटबंदी
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५००-१००० की नोट से
जेब था मेरा भारी
बड़े बड़े नोट से
भरी पड़ी अलमारी। १
काली-धोली अलग अलग
बड़ी नोटे थी सारी
नोटबंदी का देखो तमाशा
खरीद भी न पाया चाय और खारी। २
ये नोटबंदी का खेल
सीख दे गया घणी भारी
जहा काम आवे सुई
क्या करे तलवारी। ३
%%%%%%%%%%%%%%%%
बैंक में लाग री लंबी कतार
काली कमाई हो गयी तार तार
जो न छुए जिंदगी में अख़बार
पढ़ रहे खबरे बार बार । ४
बैंको की लाइन में खड़े खड़े
हो गया नज़रो में प्यार वार
पुराना धोखेबाज आशिक़ दिखा
खा कर गया वो जुते चार। ५
नकली नोटों की भी तो
बाजार में थी भरमार ,
किराये के दशहत गर्दो पर
भारी पड़ा नोटबंदी का वार। ६
%%%%%%%%%%%%%%%%%%
हैं कही छुपा रखा तो
कर दे सबसे खुली बात,
नहीं तो गर पड़ गया छापा
तो आ जायेगा हृदयाघात। ७
गर ईमान से पैसा जोड़ा ,
आज वो दे मुछो पे ताव
बेईमानी को कालो धन तो
नोटबंदी देगी थाणे घाव। ८
आज चाहता हैं पांचाल
सबको एक बात सिखानी
करके मदद बईमान की
हमे न करनी हैं बईमानी। ९
काले को सफ़ेद करने वो
रकम तेरे खाते में डलवाएगा
लेकिन भोले माणुस तू
जिंदगी भर फस जायेगा। १०
हर नागरिक बनके सिपाही
सब सच्चाई के साथ हैं
भष्ट्राचार के ख़िलाफ़
ये लड़ाई कुछ खास हैं। ११
इतना कुछ सहा हैं तो
थोड़ा और सहना हैं
आखिर हमे स्वप्निल भविष्य के
बीजो को भी तो बोना हैं। १२
-भावनेश पंचाल
जेब था मेरा भारी
बड़े बड़े नोट से
भरी पड़ी अलमारी। १
काली-धोली अलग अलग
बड़ी नोटे थी सारी
नोटबंदी का देखो तमाशा
खरीद भी न पाया चाय और खारी। २
ये नोटबंदी का खेल
सीख दे गया घणी भारी
जहा काम आवे सुई
क्या करे तलवारी। ३
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बैंक में लाग री लंबी कतार
काली कमाई हो गयी तार तार
जो न छुए जिंदगी में अख़बार
पढ़ रहे खबरे बार बार । ४
बैंको की लाइन में खड़े खड़े
हो गया नज़रो में प्यार वार
पुराना धोखेबाज आशिक़ दिखा
खा कर गया वो जुते चार। ५
नकली नोटों की भी तो
बाजार में थी भरमार ,
किराये के दशहत गर्दो पर
भारी पड़ा नोटबंदी का वार। ६
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हैं कही छुपा रखा तो
कर दे सबसे खुली बात,
नहीं तो गर पड़ गया छापा
तो आ जायेगा हृदयाघात। ७
गर ईमान से पैसा जोड़ा ,
आज वो दे मुछो पे ताव
बेईमानी को कालो धन तो
नोटबंदी देगी थाणे घाव। ८
आज चाहता हैं पांचाल
सबको एक बात सिखानी
करके मदद बईमान की
हमे न करनी हैं बईमानी। ९
काले को सफ़ेद करने वो
रकम तेरे खाते में डलवाएगा
लेकिन भोले माणुस तू
जिंदगी भर फस जायेगा। १०
हर नागरिक बनके सिपाही
सब सच्चाई के साथ हैं
भष्ट्राचार के ख़िलाफ़
ये लड़ाई कुछ खास हैं। ११
इतना कुछ सहा हैं तो
थोड़ा और सहना हैं
आखिर हमे स्वप्निल भविष्य के
बीजो को भी तो बोना हैं। १२
-भावनेश पंचाल





